मुंबई की एमआरए मार्ग पुलिस ने चार चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) तथा कई कंपनियों के निदेशकों और सहयोगियों के खिलाफ फर्जी Form 15CB प्रमाणपत्र जारी करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। आरोप है कि इन CA ने जरूरी वित्तीय और लेन-देन से संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किए बिना प्रमाणपत्र जारी किए, जिनके आधार पर वित्त वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच कुल 2,575.83 करोड़ रुपये की विदेशी रकम भेजी गई।
मुंबई आयकर विभाग के सहायक निदेशक प्रतीक नंदकिशोर मंत्री (30) ने FIR दर्ज कराई है। FIR के अनुसार, आयकर विभाग को गोपनीय सूचना मिली थी कि चार CA—रवि धनपत सिंह चौधरी, अभिषेक अरविंद कुलकर्णी, सीताराम महाबलेश्वर भट और नलिन रतीलाल पंचाल—ने संबंधित दस्तावेजों की जांच किए बिना Form 15CB प्रमाणपत्र तैयार कर जारी किए और बाद में उन्हें विदेशों में रकम भेजने की प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल किया गया।
आयकर विभाग ने 18 अगस्त 2026 को जांच की और शिकायत में उल्लिखित प्रावधानों के तहत चारों CA के बयान दर्ज किए।
जांच के अनुसार, CA रवि धनपत सिंह चौधरी ने 2021-22 से 2024-25 के बीच नौ संस्थाओं के लिए 618 Form 15CB प्रमाणपत्र जारी किए। इनसे जुड़े विदेशी लेन-देन की कुल राशि करीब 821.35 करोड़ रुपये थी।
इन संस्थाओं में Shimora Overseas Private Limited, 4X Global Ventures Private Limited, Richman Overseas Logistics Private Limited, Mermaid Overseas Logistics India Private Limited, Ancient Overseas Shipping Private Limited, Shimmery Logistics India Private Limited, Scribbling Shipping Private Limited, Shimron Films & Media Private Limited और Sancho Overseas Private Limited शामिल हैं।
शिकायत के मुताबिक, पूछताछ के दौरान रवि धनपत सिंह चौधरी ने स्वीकार किया कि प्रमाणपत्र जारी करने से पहले उन्होंने खातों की पुस्तकों, समझौतों और अन्य जरूरी दस्तावेजों की व्यक्तिगत रूप से जांच नहीं की थी। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि एक परिचित ने उन्हें कुछ लोगों से मिलवाया था, जो Form 15CB से संबंधित काम के लिए उनसे संपर्क करते थे और अधिकांश बातचीत फोन पर होती थी।
इसी तरह, CA अभिषेक अरविंद कुलकर्णी ने 18 संस्थाओं के लिए 408 Form 15CB प्रमाणपत्र जारी किए। इनसे जुड़े लेन-देन की राशि करीब 431.37 करोड़ रुपये थी। इनमें Terrific Supply Chain Solutions Private Limited, His Grace Management Private Limited, Tricton Logistics Private Limited, Herd Technologies Private Limited, Atheios Marine Services Private Limited, Vardhman Enterprises, Auspicious IT Solutions Private Limited और Reenine Trading Private Limited सहित अन्य संस्थाएं शामिल हैं।
शिकायत के अनुसार, अभिषेक कुलकर्णी ने भी स्वीकार किया कि उन्होंने संबंधित खातों और सहायक दस्तावेजों का सत्यापन नहीं किया था। उन्होंने जांचकर्ताओं को बताया कि दो अन्य CA ने उन्हें इन संस्थाओं से Form 15CB से संबंधित काम के लिए मिलवाया था।
CA सीताराम महाबलेश्वर भट ने आठ संस्थाओं के लिए 163 Form 15CB प्रमाणपत्र जारी किए, जिनसे करीब 200.58 करोड़ रुपये के विदेशी रेमिटेंस जुड़े थे। इनमें Qik Transit Logistics Private Limited, Golden Kites Media LLP, Hfigo Technologies Private Limited, Aroveo Technologies Private Limited, Beamzing Logistics Private Limited, Semi Circle Media LLP, Mindshare Tech Media LLP और AJB Tech Solutions Private Limited शामिल हैं।
शिकायत में आरोप है कि सीताराम भट ने स्वीकार किया कि मुंबई स्थित उनके कार्यालय में काम करने वाले कई लोगों ने उनके Digital Signature Certificate (DSC) का इस्तेमाल कर Form 15CB प्रमाणपत्र बनाए। उन्होंने कथित तौर पर बताया कि ये प्रमाणपत्र संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किए बिना जारी किए गए।
वहीं, CA नलिन रतीलाल पंचाल ने नौ संस्थाओं के लिए 791 Form 15CB प्रमाणपत्र जारी किए। इनसे जुड़े लेन-देन की राशि करीब 1,122.53 करोड़ रुपये थी। इनमें Ecombobby Infotech Private Limited, Monic Infosys India Private Limited, Calibera Solutions Services Private Limited, Skylight Interfaces Private Limited, Magbliss Infotech Private Limited, Aimbot Gaming IT Services Private Limited, Green Zone Technologies, Great Stride Films और Speedologi Services Private Limited शामिल हैं।
शिकायत के मुताबिक, नलिन पंचाल ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपना डिजिटल सिग्नेचर एक अन्य व्यक्ति और एक सहयोगी को उपलब्ध कराया था। प्रमाणपत्र जारी करने के लिए जरूरी OTP कथित तौर पर नलिन पंचाल को मिलते थे, जिन्हें वह डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति के साथ साझा करते थे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने प्रमाणपत्रों या उनसे जुड़े मूल दस्तावेजों का सत्यापन नहीं किया था।
आयकर विभाग की जांच में यह भी सामने आया कि कई कंपनियां अपने पंजीकृत पते पर मौजूद नहीं मिलीं। शिकायत में कहा गया है कि इन संस्थाओं ने आयकर रिटर्न में बेहद कम आय दिखाई थी, जबकि उनके जरिए विदेशों में बड़ी रकम भेजे जाने का आरोप है। इसी वजह से विभाग ने इन संस्थाओं को संदिग्ध शेल कंपनियां बताया है।
शिकायत के अनुसार, आयकर नियम, 1962 के Rule 37BB के तहत Form 15CB प्रमाणित करने वाले CA को रेमिटर और प्राप्तकर्ता के बीच समझौते, खातों की पुस्तकों, भुगतान की प्रकृति और लागू टैक्स/TDS प्रावधानों सहित संबंधित दस्तावेजों की जांच करनी होती है।
आयकर विभाग का आरोप है कि चारों CA ने कंपनियों के निदेशकों और अन्य लोगों के साथ मिलकर कथित तौर पर शेल कंपनियां बनाई या संचालित कीं और फर्जी Form 15CB प्रमाणपत्रों के जरिए विदेशों में रकम भेजने की सुविधा उपलब्ध कराई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इन लेन-देन से कर चोरी हुई तथा भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और आर्थिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
शिकायत के आधार पर एमआरए मार्ग पुलिस ने चारों CA के साथ-साथ संबंधित कंपनियों के निदेशकों और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस की आगे की जांच जारी है। जांच के दौरान अन्य आरोपियों की पहचान करने, विदेश भेजी गई रकम का पता लगाने तथा कथित कर चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की वास्तविक सीमा निर्धारित करने का प्रयास किया जा रहा है।
